बात

और कोई चर्चा न कोई बात है

बात ,बात में बात ,तेरी ही बात है ।

हादसो के शहर से है तेरा मेरा वास्ता

मौत की परवाह करे क्यों ,जब जिन्दगी से बात है।

रूठ जाते हो कभी ,मुस्कराते हो कभी

हाथ जोड़े मैं खड़ा हूँ भला ये भी कोई बात है।

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धड़कन

हवा मैं कुछ नमी सी है

उसकी चर्चा कुछ चली सी है

धड़कनो पर नहीं अख्तियार मेरा

उसकी पदचाप कुछ सुनी सी है।

सुबह से दोपहर ,दोपहर से शाम हुई सी है

शहर में सब है पर कुछ कमी सी है

आखो पर नही रहा अख्तियार मेरा

उसकी राह पर लगी सी है ।

कौन थामे आरजू की उड़ान

दिल की चाहत कुछ जगी सी है

जागा हूँ सोया सोया सा

उसकी आँखों से आँखें मिली सी है ।

आसमान साफ है

छंट गए संशय के बादल

आज फिर साफ है आसमान

हवा ने रूख बदल लिया

अल्हड मस्त हवा लौट आई

दिशा दिशा गूँज उठा नया स्वर

गाँव गाँव फसल महक रही

उदास शाम विदा अलविदा

नया सूर्योदय पूरब से होने को

पक्षी चहचहा उठे

तुम्हारे लौट आने की खबर ने

सब बदल दिया ।

अकेला

कितना अकेला हूँ तुम्हारे बिना

हर दिशा शांत गहरा सन्नाटा

बोझिल बोझिल सी हवा

अंधेरे के महासागर में

नही दिखते आसमान में सितारे

घुटी घुटी सी साँस

मैं पुकारता हूँ तुम्हारा नाम

आवाज नहीं निकलती

तुमको ढूंढने निकल आया हूँ

गली गली भटक रहा हूँ

दिशा भ्रम हो गया

ये मैं कहाँ खो गया

कुछ सूझ नहीं रहा

सब भूल गया हूँ

तुम्हारे नाम के सिवाय ।

शहर में बन्द

शहर बंद भारत बंद

शहर में चक्का जाम

दुकान बंद काम बंद

शहर जागा और

दिग्भ्रमित लोगों के हाथों

गिरफ्तार हो गया

गिरफ्तार हो गई सारी व्यवस्था

सीधे सच्चे लोग खड़े खड़े निहार रहे हैं

इंटरव्यू के लिए जाते नौजवान

अपने भाग्य को कोस रहे हैं

बीमार मां को अस्पताल ले जाता बेटा

हाथ जोड़ कर जाने की गुहार लगाता है

शहर अपाहिज हो गया

दिन की रोशनी में घना अंधकार छा गया

वक्त बुरा आ गया ।

अव्यवस्था के साए में

राजनीति की नई इबारत

गढी जा रही है

नेताओं की दुत्कारी गई पीढ़ी

पैट्रोल की बढ़ती कीमतों में

सपनो की गाड़ी दौड़ा रहीं है ।

शहर दर शहर यही हाल है

ओछी राजनीति से देश बदनाम है ।

शहर

भागते भागते शहर के

आखिरी छोर पर खड़ा हूँ

सुस्ताने के लिए

समझ नहीं आ रहा है

कहाँ जा रहा हूँ

शायद मैं कुछ तलाश रहा हूँ

उसे न जाने किसे ढूंढ रहा हूँ

उसका हुलिया ठीक से याद नहीं

उसके ललाट पर गहरी रेखाएँ

सीधी खड़ी नासिका

होठो पर हल्की सी हँसी

शहर में गुम हो गया कहीं ।

पुलिस के रिकार्ड में दर्ज है

बहुत सारे लोगों के नाम

जिनकी तलाश में भटक रहे

फोटो दिखा दिखा कर रोते परिजन

भूखे प्यासे हताश निराश

जिनका भरोसा उठ चुका है

शहर की व्यवस्था से

हर गली चोराहे पर व्यवस्था

चौपट हो औन्धी पड़ी है ।

फिर दौड़ रहा हूँ शहर की ओर

उसका पता लगाने

तभी एक अजनबी

रास्ता रोककर करता है पूछताछ

कहाँ जा रहे किसकी है तलाश

कुछ जेब ढीली करो तो

बन सकता है तुम्हारा काम

फिर तलाशी लेता है धकियाते हुए

खाली जेब पाकर गाली देता है

कुछ नहीं हो सकता

तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता

जाओ भाग जाओ।

मंजिल

मंजिल का पता नहीं मालूम

उसको सपने में देखा है

शहर में सभी उसे ढूंढ रहे हैं

वह यही आसपास है

कई उसे पहचानते हैं

कुछ को पता है वह कहाँ रहती है

कई लोग उसके घर गए हैं ।

शहरों में कई तरह के धन्धे हैं

कुछ लोग मंजिल को पाने का

प्रशिक्षण देते हैं ।

मंजिल बड़ी हसीन होती है

बडी मुश्किल से मिलती है

अधिकांश को परिश्रम से मिलती है

कुछ को धनबल से ।