यादों की पोटली

मैं यहाँ

तुम वहाँ

यादों का स्वर मिलता है

अनजान राहो में चलते चलते

परिचित हो जाते हैं ।

परिचय की डोर में बंधकर

एक ही गीत गाते हैं

शहर के अलग अलग हिस्सों से ।

प्रेम गीत गाने लगे

गुनगुनाने लगे ।

दिन रात बदलते हैं

चाँद तारों संग

हम भी चलते हैं

दूर दूर रहकर भी

एक दूसरे का हाथ थामे हैं ।

एक की आवाज पर

दूसरा भी चलता है

यादों के सिलसिले में

करवट बदलता है ।

सोते सोते भी

उसी का नाम जपता है

चोरी चोरी यही सब चलता है

यादों की पोटली में

गीत मधुर बजता है ।

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