पैगाम

फिर तुमने पैगाम भेजा है

शब्दहीन **********

कुछ बिन्दू हैं *****

भावनाओ का अतिरेक ।

शब्द ओछे पड़ गये हैं

संवेदना को वहन करने में ।

इन बिन्दुओ में

छिपे पड़े हैं दिल के मोती।

सीधी सच्ची बात को कहना

कितना मुश्किल

खतरा है गलत न समझ लिया जाए

सगुम्फित भावनाओं को ।

मैं समझ पा रहा हूँ

इनमें तुम्हारी अकुलाहट, आक्रोश

प्यार, दुलार, मनुहार

हास,परिहास ।

पैगाम&rdquo पर एक विचार;

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