सपने

सदाबहार सपनों के सिवाय

कुछ नहीं है कविता

उसने पूछा था या कि बताया था

आदमी तमाम उम्र हसरतो में

जिन्दा रहता है

बीवी सुंदर होनी ही चाहिए कुरूप की भी

बेशक गून्गी बहरी ।

रोशनी का हक सबका

दोस्ती का हक सबका

सजा है अकेलापन

गुफ्तगू का हक सबका ।

ब्वाॅय फ्रेंड के साथ

बाइक पर बैठी लड़की

अपना स्तन भार

उसकी कमर पर डालते हुए

चुहलबाजी में

उसकी टान्गो के बीच

कोमल अंग को सहलाती है

आनेवाले खतरे से बेखबर ।

कुछ लोग बंद मुट्ठी

हवा में लहराकर इन्साफ माँगंते हैं

माँ रोती है बेटी के लिए

पुतला दहन किया गया

महिलाओं की सुरक्षा के प्रति उदासीन

सरकार का ।

सिरफिरे आशिक एकत्र हो कर

स्त्री गरिमा को बचाने की मुहिम

स्त्री के हक की लड़ाई की

आवाज बुलंद करते हैं ।

लड़की सीधी सच्ची है

एक पति की तलाश में

परीक्षा लेते लेते

खुद एक प्रश्न बन गई ।

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