प्रेरणा गीत

प्रातःकाल की बेला में,

जब सूर्य अपनी अरुणिमा से

रंग देता हैआकाश ,पहाड़

पेड़,नदी,बाग,बगीचे,खेत खलिहान

प्रकृति के मनोरम दृश्यों के बीच

पक्षी गाते हैं प्रेरणा के गीत ।

नदी की निर्मल जलधारा

पत्थरों से आलिंगनबद्ध होते हुए

स्नेहासिक्त करती हुई

गुनगुनाती है प्रेरणा का गीत ।

खेतों की ओर जाते किसान

गाय, बैल ,भैंस और बकरी को

चारा खिलाती उसकी पत्नी की

पायल से जगता है प्रेरणा का गीत ।

प्रातःकाल की मंद मंद समीर

अपने स्पर्श से सबको जगाती हुई

कली कली,फूल फूल की गंध समेटे

वसुधा के कण कण में जगाती है

प्रेरणा का गीत ।

प्रातःकाल तुम्हारा दर्शन

नवजीवन का संचरण

मेरे प्राण प्राण में

गुंजा देता है

प्रेरणा का गीत ।

2 विचार “प्रेरणा गीत&rdquo पर;

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