तुम

बंदिशों से ज़िदगी यूँ तार तार हो गयी

मैं न बोला ,तू न बोली,हँसी सारी खो गयी ।

याद करके तुमको,रोया हूँ मैं बार बार

आँख में पानी नहीं अब,भर गया गर्द गुबार ।

शहर भर में चली चर्चा,तेरे हुस्न मेरे प्यार की

रौशनी का दरिया है तू,मैं ठहरी हुई रफ्तार हूँ ।

2 विचार “तुम&rdquo पर;

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