एक क्षण

बहुत कुछ था यादों के दरम्यान

अंधेरी रातों में मशाल बन गया ।

कहूं या न कहूं इसी कशमकश में

गुजर गये साल दर साल

न फिर हम मिलें न वो बात हुई ।

बस वही एक क्षण था जो गुजर गया

घास की पत्तियाँ तोड़ते तोड़ते

इधर देखा उधर देखा ,बस उसे ना देखा

जिसको दैखने की चाहत में बहुत सी शामें गुजार दी ।

2 विचार “एक क्षण&rdquo पर;

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