खिड़कियाँ

खोल दो खिड़कियाँ

आने दो ताजी हवा

आसमान के खुलेपन को

समेटना है मुझे ।

आसमान से जुड़ी है

धरती पर फैली हरियाली

उर्ध्वमुखी ऊर्जा का वितान

मैं उसके स्पर्श पाश में आबद्ध हो

डूब जाना चाहता हूँ इस सुख सागर में ।

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s