करवट

मैं फिर लौट आऊगां

बादलों की तरह

गरज गरज कर

अपनी प्रेम वर्षा करने ।

हवाएँ सारी तपन सोख लेगीं

मंद मंद सहलाती सी

चाहतों को जगाती हुई

मिठास घोलती सी

आगे बढ़ जाएगी ।

मिट्टी मे छिपी महक सी

तुम यही हो

मेरे अंतर्मन की प्यास …..

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s